मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
रविवार, नवंबर 3
शांतता
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शांतता आज हम थे और सन्नाटा था सन्नाटा ! जो चारों और फैला था बहा आ रहा था न जाने कहाँ से अंतरिक्ष भी छोटा पड़ गया था जैसे शायद अनंत की ब...
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बुधवार, अक्टूबर 30
एक दीप अंतर करुणा का
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एक दीप अंतर करुणा का दीप जलायें शुभ स्मृतियों के स्मरण करें राघव, माँ सीता, इस बार दिवाली में हम मिल वरण करें कान्हा की गीता ! साधें सुमि...
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सोमवार, अक्टूबर 28
ऑरोविल - प्रभात की नगरी
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ऑरोविल - प्रभात की नगरी {दूसरा भाग} संध्या काल में हम आश्रम के निकट स्थित समुद्र तट पर गये, जहाँ कई लोग आये हुए थे। लंबे तट पर जगह-जगह काले...
शनिवार, अक्टूबर 26
ऑरोविल - प्रभात की नगरी
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ऑरोविल - प्रभात की नगरी पांडिचेरी को पहले पुदुचेरी के नाम से जाना जाता था।तमिल भाषा के अनुसार पुदुचेरी का अर्थ है “नया शहर”।पहली शताब्दी ...
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गुरुवार, अक्टूबर 24
जीवन यही तो माँगता
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जीवन यही तो माँगता हम कौन हैं ? यह याद है ? गर याद, दिल आबाद है आबाद है इक ख़्वाब से मंज़िल यहीं, इस बात से ! है याद? हमको क्या मिला?...
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मंगलवार, अक्टूबर 22
देव और असुर
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देव और असुर किन्हीं सबल क्षणों का नाम देव और दुर्बल क्षणों का नाम असुर रखकर मानव ने मुक्ति पा ली ! जब मन स्वस्थ है, सजग है आशान्वित है ...
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रविवार, अक्टूबर 20
यात्रा
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यात्रा मन के पार एक अजाना लोक छिपा है जहाँ से रह-रह कर आहट आती है शांति की गूँज सुनायी देती है किसी अन्य काल की यात्री को आगे बढ़ना ह...
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गुरुवार, अक्टूबर 17
हकीकत
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हकीकत "हर रात सपनों से भरी थी दिवस कोई ख़ाली कहाँ था कहाँ पाते ओ ! रब तुझे हम बंद जग का हर इक मकाँ था" जाना कहाँ था, पहुँचे क...
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शुक्रवार, अक्टूबर 11
बदलता हुआ बनारस
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बदलता हुआ बनारस कल दोपहर हम असम से कोलकाता के लिए रवाना हुए। एयरपोर्ट से सीधे स्टेशन का रुख़ किया, जहां से हमें बनारस के लिए कालका मेल पकड़...
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बुधवार, अक्टूबर 9
रेत पर टिकते नहीं घर
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रेत पर टिकते नहीं घर स्वप्न ही तो है जगत यह टूटना नियति है इसकी, सत्य मानो या सहेजो छूटना फ़ितरत इसी की ! आँख भरकर देख लो बस मुस्कुर...
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