मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
अश्रु
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अश्रु
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गुरुवार, मई 25
है कोई अनुबंध अनकहा
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है कोई अनुबंध अनकहा अंक लिए संपूर्ण सृष्टि को वह असीम यूँ डोल रहा है, ह्रदय गुहा का वासी भी है निज रहस्य को खोल रहा है ! अंतरैक्य जब भी ...
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बुधवार, नवंबर 4
चेतना हर हल बनेगी
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चेतना हर हल बनेगी आग भीतर जो जलाती पथ प्रदर्शक भी वही है, अश्रु बनकर जल बहा जो मनस शोधक भी वही है ! शोक पाहन सा चुभे जो पा...
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शुक्रवार, मार्च 6
चाह-अचाह
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चाह-अचाह हर चाह रिझाती है पहले फिर वही भगाती है मन-सागर में लहरों की एक पंक्ति जगाती है मन के सूने पनघट पर ही उसके ...
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शुक्रवार, जनवरी 12
कदमों में भी राहें हैं
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कदमों में भी राहें हैं अभी जुम्बिश भुजाओं में कदगों में भी राहें हैं , अभी है हौसला दिल में गंतव्य पर निगाहें हैं ! पर...
8 टिप्पणियां:
मंगलवार, दिसंबर 13
राग प्रीत का जो साधा था
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राग प्रीत का जो साधा था है विशाल, अनन्त, अनूठा कैसे लघु मन उसको जाने शिखर चाहता भय खाई से सीमा स्वयं की, यह न माने ! ...
गुरुवार, मई 14
मृत्यु और जीवन
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मृत्यु और जीवन मौत एक पल में छीन लेती है कितना कुछ माथे का सिंदूर हाथों की चूड़ियाँ मन का चैन और अधरों की हँसी पत्नी होने का स...
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