मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
आधार
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
आधार
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, मार्च 11
सत्यमेव जयते
›
सत्यमेव जयते सत्य की विजय होती है सदा क्योंकि सत्य ही विजय है ! सत्य अग्नि है जो हर झूठ को निगल जाती है अंतत: ! सत्य का दामन काँटों भरा ल...
9 टिप्पणियां:
गुरुवार, सितंबर 16
चाह और प्रेम
›
चाह हर चाह नश्वर की होती है शाश्वत को नहीं चाहा जा सकता वह आधार है चाहने वाले का हर याचक आकाश से उपजा है और पृथ्वी की याचना करता है प...
10 टिप्पणियां:
रविवार, जनवरी 17
तुम यदि
›
तुम यदि तुम यदि बन जाओ सूत्रधार तो सँवर ही जायेगा जीवन का हर क्षण मुस्कान झरेगी जैसे झरते हैं फूल शेफाली के अनायास ही हवा के हल्के से...
3 टिप्पणियां:
मंगलवार, अक्टूबर 20
ठहरे विमल झील का दर्पण
›
ठहरे विमल झील का दर्पण पूर्ण चन्द्रमा, पूर्ण समंदर पूर्ण, पूर्ण से मिलने जाये, माने मन स्वयं को अधूरा अधजल गगरी छलकत जाये ! चाहों के ...
4 टिप्पणियां:
गुरुवार, अप्रैल 12
पल-पल सरक रहा संसार
›
पल-पल सरक रहा संसार कौन यहाँ किसको ढूंढे है किसे यहाँ किधर जाना है , खबर नहीं कण भर भी इसकी पल भर का नहीं ठिकाना है !...
7 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें