मन पाए विश्राम जहाँ
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गुरुवार, अक्टूबर 30
वही थाम लेता राहों में
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वही थाम लेता राहों में कोई लिखवा जाता है ज्यों जहाँ कलम, कागज सम्मुख है, अक्षर भरते से जाते हैं मौन सदा, जो जगत प्रमुख है ! वही शब्द है ...
20 टिप्पणियां:
मंगलवार, नवंबर 17
खत
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खत किसी सूनी शाम को हथेलियों पर ठोड़ी टिकाये लिखने वाली मेज पर बैठे कोई बात फड़फड़ायी होगी तुम्हारे मन में लिखो फिर काट दो तकते रहो निरु...
11 टिप्पणियां:
सोमवार, जनवरी 2
रंग भर रहा कोई पल-पल
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रंग भर रहा कोई पल-पल कोकिल कहाँ सोचती होगी किस सुर में गाना है पंचम सुर में सहज कंठ से बहता मधुर तराना है नदिया कब किस...
4 टिप्पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 18
उसका नाम
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उसका नाम जब कोरा हो मन का पन्ना तभी लिख लो प्रियतम का नाम उस पर नहीं तो जमाना लिख देगा इधर-उधर की इबारतें महत्वाकांक्षा ...
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