मन पाए विश्राम जहाँ
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जाल
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जाल
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बुधवार, दिसंबर 16
चिदाकाश में भरे उड़ान
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चिदाकाश में भरे उड़ान मोह तमस का जाल बिछा है हंस बना है उसका कैदी, सुख के दाने कभी-कभी हैं उहापोह है घड़ी-घड़ी की ! टूटे जाल मुक्त हो हंसा ...
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गुरुवार, मई 14
शब्द जाल
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शब्द जाल शब्दों के जाल में मन का पंछी फंस गया है मात्र शब्द हैं वे पर दंश उनका डस गया है शब्द हजार हों या लाख फिर भी उनकी स...
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मंगलवार, मई 1
अर्थवान हों शब्द हमारे
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अर्थवान हों शब्द हमारे शब्दों का संसार सजाया मन जिसमें डूबा उतराया, पहुँचा कहीं न लोटपोट कर वैसे का वैसा घर आया ! शब्दों ...
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