मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
तेल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
तेल
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, सितंबर 2
देह दीप में तेल हृदय यह
›
देह दीप में तेल हृदय यह ज्योति पुष्प उर के उपवन में खिला सदा है उसे निहारें, सुख का सागर भीतर बहता सदा रहा है उसे पुकारें ! नयनों में उसी ...
7 टिप्पणियां:
शनिवार, जुलाई 15
उन अँधेरों से डरें क्यों
›
उन अँधेरों से डरें क्यों खो गया है घर में कोई चलो उसे ढूँढ़ते हैं बह रही जो मन की सरिता बांध कोई बाँधते हैं आँधियों की ऊर्जा क...
8 टिप्पणियां:
सोमवार, मई 27
इक दिया, कुछ तेल, बाती
›
इक दिया, कुछ तेल, बाती खो गया है कोई घर में चलो उसको ढूँढ़ते हैं बह रहा जो मन कहीं भी बांध कोई बाँधते हैं आँधियों की ऊर्ज...
12 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें