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दृश्य
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बुधवार, नवंबर 25
जीवन क्या है ?
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जीवन क्या है ? स्थूल से सूक्ष्म तक जाने की यात्रा अथवा ज्ञात से अज्ञात को दृश्य से अदृश्य को पकड़ने की चाह रूप के पीछे अरूप ध्वनि के पीछे ...
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सोमवार, मई 25
साँझा नभ साँझी है धरती
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साँझा नभ साँझी है धरती दोनों के पार वही दर्शन जो दृश्य बना वह द्रष्टा है, जल लहरों में सागर में भी जो सृष्टि हुआ वह सृष्...
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शनिवार, मार्च 21
जब राज खुलेगा इक दिन यह
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जब राज खुलेगा इक दिन यह जो द्रष्टा है वह दृश्य बना स्वप्नों में भेद यही खुलता, अंतर बंट जाय टुकड़ों में फिर अनगिन रूप गढ़ा ...
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गुरुवार, अप्रैल 4
ट्रेन की खिड़की से
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ट्रेन की खिड़की से उस दिन दिखे थे दूर तक फैले सजे-संवरे चौकोर खेत कतारों में उगी फसलें तैरती बत्तखें, लघु नाव निकट पटर...
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गुरुवार, अप्रैल 26
दृश्य नहीं वह द्रष्टा है
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दृश्य नहीं वह द्रष्टा है वह कैद नहीं है मंदिर में दृश्य नहीं वह द्रष्टा है, नाम-रूप में बंध न सके सृष्टि नहीं वह सृष्टा ...
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