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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
बगिया
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रविवार, नवंबर 1
फार्म हाउस में एक दिन
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फार्म हाउस में एक दिन भोर पूर्व आरंभ हुई थी, एक यात्रा सृष्टि फ़ार्म की उडुपी ग्रैंड में किया नाश्ता, शिवगंगे की ओर दृष्टि थी चट्टानों में...
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मंगलवार, मई 19
नींदें हैं सदियों की
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नींदें हैं सदियों की छोटे से जीवन में भरना है आकाश, नन्ही सी बगिया में पलना है पलाश ! कुछ ही तो पल होंगे जीवन मुस्का...
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बुधवार, मई 25
संध्या राग
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संध्या राग मसूर की दाल के से गुलाबी बार्डर वाले सुरमई बादल मानो संध्या ने पहनी हो नई साड़ी कुहू-कुहू की तान गुंजाती ध्वनि और यह मंद पव...
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