मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
रक्त
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रक्त
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गुरुवार, दिसंबर 31
सांझी धरती गगन एक है
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सांझी धरती गगन एक है है सृष्टि क्रम अनंत काल से चाँद-सितारे भी युग-युग से, किन्तु पुरातन कभी न होते पल-पल खुद को नूतन करते ! जंगल, वन, पर...
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मंगलवार, मार्च 19
ठिठक गयी कोयल की कूक
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ठिठक गयी कोयल की कूक मुरझाई सी आम्र मंजरी ठिठक गयी कोयल की कूक, जाने कौन निगोड़ी आकर गई कान में उसके फूँक ! कैसे घोले...
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मंगलवार, जुलाई 12
उससे मिलन न क्योंकर होता
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उससे मिलन न क्योंकर होता पोर-पोर में श्वास-श्वास में नस-नस में हर रक्त के कण में, गहराई तक भीतर मन में छाया जो पूरे जीवन में ! उससे ही हम...
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