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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
संशय
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संशय
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मंगलवार, नवंबर 5
अस्तित्त्व और हम
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अस्तित्त्व और हम जब सौंप दिया है स्वयं को अस्तित्त्व के हाथों में तब भय कैसा ? जब चल पड़े हैं कदम उस पथ पर उस तक जाता है जो तो संशय कैस...
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मंगलवार, अक्टूबर 1
मिट जाएँगे संशय उर से
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मिट जाएँगे संशय उर से झाँकें कान्हा के नयनों में प्रेम समंदर एक झलकता, डूब गई थी राधा जिसमें थाह न कोई जिसकी पाता ! अनगिन नाम दिये हैं जग...
6 टिप्पणियां:
गुरुवार, जुलाई 16
माया
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माया कभी दर्द दिया कभी मुस्कानें कभी रोये औरों के दुःख पर फिर दिए उन्हीं को ही ताने कभी राह दिखाई मंजिल की कभी मन मे...
7 टिप्पणियां:
सोमवार, दिसंबर 23
मन इक बगिया सा खिल जाता
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मन इक बगिया सा खिल जाता निज के मुखड़े पर धूल लगी दर्पण को दोष दिए जाते हिंसा जब मन में बसती हो अवसर भी उसके मिल जाते स्वीका...
10 टिप्पणियां:
बुधवार, जनवरी 2
वही तो हर राह है
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प्रिय मित्रों, नए वर्ष में यह पहली रचना पोस्ट कर रही हूँ, इस उम्मीद के साथ कि समय बदलेगा, जो अँधेरा आज छा गया है, छंटेगा, यह बदलाव ह...
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