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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
सिन्धु
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सिन्धु
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बुधवार, जुलाई 5
थामता है हर घड़ी वह
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थामता है हर घड़ी वह बूँद बनकर जो मिला था सिंधु सा वह बढ़ा आता, रोशनी की इक किरण था बन उजाला पथ दिखाता ! थामता है हर घड़ी वह...
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सोमवार, जुलाई 27
जीवन बंटता ही जाता है
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जीवन बंटता ही जाता है बाँट रहा दिन-रात हर घड़ी खोल दिए अकूत भंडार, युगों-युगों से जग पाता है डिगता न उसका आधार ! शस्...
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गुरुवार, जून 19
मधुर अमराई में बदले
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मधुर अमराई में बदले थामता है हर घड़ी वह जो बरसता प्रीत बनकर, खोल देता द्वार दिल के फिर सरसता गीत बन कर ! हर नुकीले रास...
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