मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
स्पंदन
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स्पंदन
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बुधवार, जुलाई 12
स्पंदन
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स्पंदन जो भी सृजित है गढ़ा गया है निरंतर गतिमान है सृजन के क्षण से तरंगित और कंपित है परमाणु में घूम रहे हैं सूक्ष्म इलेक्ट्रॉन अनव...
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गुरुवार, मार्च 15
किसने खिलकर किये इशारे
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किसने खिलकर किये इशारे पी पी कह कर कौन पुकारे किसे खोजते नयन तुम्हारे , अंतर सरस तान बन गूँजा किसने खिलकर किये इशारे ! ...
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रविवार, अगस्त 3
एक लहर शिव व सुंदर की
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एक लहर शिव व सुंदर की स्पृहा सदा सताती मन को बढ़ जाता तब उर का स्पंदन, सदानीरा सी मन की धारा कभी न लेने देती रंजन ! संप...
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