मन पाए विश्राम जहाँ
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शुक्रवार, मार्च 27
नेह घट सजाने हैं
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नेह घट सजाने हैं आशा के नहीं आस्था के दीप जलाने हैं आकाश कुसुम नहीं श्रद्धा पुष्प खिलाने हैं, हर लेंगे तम, जो भर देंगे सुवास मन ...
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सोमवार, दिसंबर 8
दुःख की ही गाथा बनती है
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दुःख की ही गाथा बनती है मौन हुए स्वर, सूना अंतर फिर भी सब पाया लगता है, अब जब लिखने की फुर्सत है मन का घट खाली लगता है ! ...
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मंगलवार, नवंबर 18
हरियाली का गांव अनोखा
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हरियाली का गांव अनोखा खिले गुलाब, मालती, बेला, फुदक रहा खगों का मेला रह-रह गूंजे कलरव मद्धम, कहीं भ्रमर का अविरत सरगम I ह...
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मंगलवार, नवंबर 4
देखो ! शाम ढलती है
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देखो ! शाम ढलती है देखो ! शाम ढलती है लौटते हैं नीड़ को खग हुए सूने गाँव के मग आस मिलन की पलती है ! जो खिले थे प्रातः बे...
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मंगलवार, जून 21
विश्व संगीत दिवस पर शुभकामनाएँ
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संगीत प्राणों में नव रस भर, मिठास संगीत भरे स्वर लहरी गुंजित हो, प्रमुदित उर सबके करे ! रसवंती धार बहे, श्रवणों को सार मिले सुर में जब गी...
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