मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
रविवार, अगस्त 29
कृष्ण जन्माष्टमी
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कृष्ण जन्माष्टमी बुद्धि हमारी देवकी मानस है वसुदेव दोनों का शुभ मिलन बने आनंद का गेह ! तन यह कारागार है अहंकार है कंस पंचेंद्रियाँ पहरा दे...
शनिवार, अगस्त 28
जब वसंत का मौसम आता
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जब वसंत का मौसम आता मेरे घर के पिछवाड़े में एक आम का वृक्ष खड़ा है, अनगिन हैं शाखाएँ उसकी लम्बा-चौड़ा तना बड़ा है I जब वसंत का मौसम आता बौरों स...
गुरुवार, अगस्त 26
एक मंजिल एक रस्ता
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एक मंजिल एक रस्ता तुम्हीं से मधुमास मेरा तुम्हीं से संसार है तुम न हो तो व्यर्थ सारा, यह मधुर श्रृंगार है ! मन अभी खिलने न पाया जब नय...
स्मृतियाँ
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स्मृतियाँ दिल के आँगन की मुँडेर पे यादों की गौरैया चहकी, फूलों वाले इस मौसम में मदमाती पुरवैया महकी ! स्मृतियों की सिर ओढ़ चुनरिया मन राधा ...
विपश्यना
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विपश्यना चंचल हिरण सा, कुलांचे भरता मन क्षण भर में जा पहुँचा, कहाँ से कहाँ भ्रम में बेचारा कोमल दूब के, लगा चबाने कटु पत्तियाँ ! हुआ ...
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बुधवार, अगस्त 25
तेरा पता
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तेरा पता तेरा पता मिला है अब जग से क्या मिलें, पहुंचेंगे तेरे दर पे अरमान ये खिलें तुझसे ही आ रही है पुरनम सी यह हवा सब को मेरी दुआ से...
शुक्रवार, अगस्त 13
१५ अगस्त
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पंद्रह अगस्त ओ मेरे देश ! भर आयी है आँख, द्रवित अंतर भीगा है अंचल तेरा रिस रहे हैं घाव टप-टप बहता है रक्त कैसे कहूँ, मुबारक जश्ने आजा...
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सोमवार, अगस्त 9
प्रीत भरी पाती
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प्रीत भरी पाती श्वासें महकें अंतर चहके, पल पल नव गीत बजें भीतर जीवन जो भी भेंट दे रहा, स्वीकारें उत्साहित होकर I कभी-कभी ढक गया उजाला, कुछ...
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गुरुवार, अगस्त 5
रक्षाबंधन
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रक्षाबंधन एक अनूठा पर्व प्रीत का मन भाया रक्षाबंधन याद दिलाने स्नेह जगाने फिर आया रक्षाबंधन ! एक नीड़ में पले सहोदर एक सुनी थी मीठ...
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मंगलवार, अगस्त 3
पन्द्रह अगस्त
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पंद्रह अगस्त नक्सलवाद उबाल खा रहा, रह-रह कर सुलगे काश्मीर कॉमन वेल्थ गेम सर पे हैं, कौन हरे भारत की पीर ! आए दिन बढ़ रहे हादसे, कभी संसद ...
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शनिवार, जुलाई 31
नयन वातायन बने
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नयन वातायन बने कोष भीतर हो छिपाए तृषित क्यों फिरते जहाँ में, पूर्ण होकर क्यों अधूरे गीत रचते इम्तहां में ! नजर से मिश्री लुटाओ फूल सी मुस्...
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गुरुवार, जुलाई 29
क्यों शिला बन गया मन
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क्यों शिला बन गया मन स्रोत भीतर प्रेम का है क्यों शिला बन गया मन प्रीत की धारा छुपी है मीत क्यों न बने जीवन सामने मधुकलश खोले राह फ...
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बुधवार, जुलाई 28
अधूरा है जग
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अधूरा है जग हर कहानी है अधूरी हर मन यहाँ कुछ खोजता रहता सदा अपूर्ण जग और राज यही खोलता सीलें इधर सीलें उधर पैबंद ही हैं हर तरफ पांव...
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शुक्रवार, जुलाई 16
गरीब की बीमारी
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गरीब की बीमारी बेबस, लाचार, गरीब आदमी बीमार पड़ने की भी जिसको इजाजत नहीं सिवा मरने के तिल-तिल चारा नहीं डॉक्टर की नजर भी, हिकारत भरी ...
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शुक्रवार, जुलाई 9
एक कहानी
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एक कहानी हम हिमाचल के बाशिंदे हैं I पिताजी व्यापारी हैं I हम दो भाई हैं I मैं छोटा हूँ, स्कूल तथा कॉलेज में मैं बहुत शरारती छात्र हुआ करता थ...
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