मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
गुरुवार, नवंबर 1
जीवन की नदी
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जीवन की नदी सुख और दुःख के दो तटों के मध्य जीवन की नदी बहती है कभी उथली, कभी गंदली कभी दीपों, फूलों से भरी जाने कितने ज...
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सोमवार, अक्टूबर 29
मन की नदी
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मन की नदी श्वास और मौन के दो तटों के मध्य बहती है मन की नदी... जिसे लील जाता है कभी अगाध मरुथल निगल जाता है कभी आसमान जान...
21 टिप्पणियां:
रविवार, अक्टूबर 28
कुछ सुनहरे पल गोवा में
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प्रिय ब्लोगर साथियों पिछले माह के अंतिम सप्ताह में मुझे गोवा जाने का सुअवसर मिला, डायरी लिखने की आदत के चलते उस यात्रा के अनुभव मैंने...
5 टिप्पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 26
कुछ सुनहरे पल गोवा में
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प्रिय ब्लोगर साथियों पिछले माह के अंतिम सप्ताह में मुझे गोवा जाने का सुअवसर मिला, डायरी लिखने की आदत के चलते उस यात्रा के अनुभव मैंने...
10 टिप्पणियां:
शनिवार, अक्टूबर 20
कुछ सुनहरे पल गोवा में
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प्रिय ब्लोगर साथियों पिछले माह के अंतिम सप्ताह में मुझे गोवा जाने का सुअवसर मिला, डायरी लिखने की आदत के चलते उस यात्रा के अनुभव मैंने...
6 टिप्पणियां:
गुरुवार, अक्टूबर 18
कुछ सुनहरे पल गोवा में
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प्रिय ब्लॉगर साथियों पिछले माह के अंतिम सप्ताह में मुझे गोवा जाने का सुअवसर मिला, डायरी लिखने की आदत के चलते उस यात्रा के अनुभव मैंने श...
16 टिप्पणियां:
शनिवार, अक्टूबर 13
नहीं अचानक मरता कोई
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नहीं अचानक मरता कोई नव अंकुर ने खोली पलकें घटा मरण जिस घड़ी बीज का, अंकुर भी तब लुप्त हुआ था अस्तित्त्व में आया पौधा ! ...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, अक्टूबर 11
जीना इसी का नाम है
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जीना इसी का नाम है अँधेरे कमरे में बंद आँखों से खाते हुए ठोकरें वे चल रहे हैं और इसे जीना कहते हैं... बाहर उजाला है सु...
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रविवार, अक्टूबर 7
नहीं, यह मंजिल नहीं है
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नहीं, यह मंजिल नहीं है नहीं, यहाँ राजपथ नहीं हैं पगडंडियाँ हैं, जो खो गयी हैं कंटीले झाड़ों में स्वयं निर्मित मार्ग पर ही ब...
19 टिप्पणियां:
गुरुवार, अक्टूबर 4
कवि अनुराग अनंत का काव्य संसार
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खामोश ख़ामोशी और हम के अगले कवि अनुराग अनंत इस कड़ी के अगले हस्ताक्षर हैं. इलाहबाद के रहने वाले अनंत ने लखनऊ से पत्रकारिता की पढ़ाई की...
3 टिप्पणियां:
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