मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
मंगलवार, मार्च 5
मन बहता हुआ इक धारा था जब
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मन बहता हुआ इक धारा था जब डोलने लगे थे पात पीपल के जरा नजर भर के निहारा था जब, तरल हो गया था आलम सारा निःशब्द होकर उसे ...
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शनिवार, मार्च 2
अपना-अपना स्वप्न देखते
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अपना-अपना स्वप्न देखते एक चक्र है सारा जीवन जन्म-मरण पर अवलंबित, एक ऊर्जा अविरत बहती हुई कभी न जो खंडित ! एक बिंदु से श...
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गुरुवार, फ़रवरी 28
शुभ विवाह
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हाल ही में एक विवाह में सम्मिलित होने का अवसर मिला, कुछ अलग सा अनुभव हुआ, क्या था वह अनुभव, आप भी पढ़िये और शामिल हो जाइये इस विवाह में.....
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सोमवार, फ़रवरी 25
जीवन दो का है खेल सदा
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जीवन दो का है खेल सदा खिलते काँटों संग पुष्प यहाँ है धूप जहाँ होगी छाया, हत्यारा गर तो संत भी है है ब्रह्म जहाँ होगी माया !...
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गुरुवार, फ़रवरी 21
यह दिन भला-भला लगता है
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यह कविता मैंने अपनी उस सखी के लिए लिखी है, जो उम्र के चौथे दशक के आखिरी पड़ाव में कार चलाना सीख रही है, आज उसके विवाह की छब्बीसवीं सालगिर...
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सोमवार, फ़रवरी 18
विदाई समारोह
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यह कविता मैंने इवा जी के लिए लिखी है, जिनका विदाई समारोह इसी हफ्ते हमारे क्लब में होने जा रहा है, वह एक शिक्षिका हैं और मेरा पुत्र भी उन...
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बुधवार, फ़रवरी 13
ओढ़ते तरुवर नूतन गात
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ओढ़ते तरुवर नूतन गात उड़ा मकरंद, बहा आनंद गाया प्रकृति ने नव छंद पड़ी ढोलक पर प्यारी थाप हर कहीं रंगों वाली छाप मधु...
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सोमवार, फ़रवरी 11
सभी जोड़ों को समर्पित जिनके विवाह की सालगिरह इस हफ्ते है
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कल बड़े भैया-भाभी के विवाह की वर्षगाँठ है, यह कविता उनके साथ उन सभी के लिए है जिनके विवाह की सालगिरह इस हफ्ते है. विवाह की वर्षगाँठ ...
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शनिवार, फ़रवरी 9
उसी घड़ी में कुछ घट जाता
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उसी घड़ी में कुछ घट जाता वक्त का दरिया बहता जाता यूँ लगता कुछ कहता जाता ! कल का सूरज कहाँ खो गया आयेगा जो किधर से आये...
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बुधवार, फ़रवरी 6
कवयित्री ऋता शेखर मधु का काव्य संसार- खामोश ख़ामोशी और हम में
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खामोश, ख़ामोशी और हम की अगली कवयित्री हैं, ब्लॉग जगत की जानी - मानी ऋता शेखर ‘मधु’. ऋता जी वनस्पति शास्त्र की शिक्षिका हैं. काव्य की सभ...
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