जहां कुछ भी नहीं था
वहीं सब कुछ हुआ है,
जहां इक सोच भर थी
वहाँ जग ये बना है !
तू ही वहाँ नजर आया था
जिसकी आँखों में भी झाँका
तू ही वहाँ नजर आया था,
बता, उस घड़ी क्या तूने भी
मुझमें खुद को ही पाया था ?
जो करना चाहा है दिल ने
सदा कहाँ कर पाए हैं हम,
ना करने की जिसे कसम ली
वहीं खड़ा खुद को पाया थम !
इससे अच्छा यह ही होता
जो सहज घटे घटने देते,
हम जीवन को, अपनी लय में
अपनी धुन में बहने देते !

