मन पाए विश्राम जहाँ
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उपहार
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सोमवार, जून 22
दिन-एक उपहार
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दिन-एक उपहार मिला है उपहार की तरह दिन आज का लिपटा हुआ एक चमकीले आवरण में हम मुग्ध हैं उसी पर खोलना नहीं चाहते रख देते हैं आलमारी म...
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सोमवार, अप्रैल 22
एकांत
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एकांत उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक धरा के इस छोर से उस छोर तक कोई दस्तक सुनाई नहीं देती जब तक सुनने की कला न आये वह कर्ण न मिलें स...
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सोमवार, जनवरी 16
इक विश्वास हृदय में अनुपम
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इक विश्वास हृदय में अनुपम जीवन इक उपहार उसी का जो सदा निकट, है सुदूर अति, जिससे यह श्वासें चलती हैं प्राणों में बल, तन-मन में गति ! जीव...
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शनिवार, दिसंबर 4
सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी
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सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी समय पे सोना औ' जागना बात-बात पर दुखी न होना, थोड़ा सा ही पौष्टिक भोजन आसन, प्राणायाम साधना...
12 टिप्पणियां:
सोमवार, जुलाई 9
पुत्र के जन्मदिन पर
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माँ का उपहार पिता ने कहा कुछ दिन पहले जन्मदिन आ रहा है तुम्हारा, क्या भेजें ! परमात्मा ने दिया है सब कुछ तुम्हें सोचा, भे...
गुरुवार, दिसंबर 29
नया वर्ष भर झोली आया
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नया वर्ष भर झोली आया मन निर्भार हुआ जाता है अंतहीन है यह विस्तार, हंसा चला उड़ान भर रहा खुला हुआ अनंत का द्वार ! मन ...
5 टिप्पणियां:
गुरुवार, जुलाई 10
इंगित हर शै तुझको करती
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इंगित हर शै तुझको करती कैसे हो अभिसार हमारा ! तुम वासी हो नीलगगन के उस अपंक निरभ्र नीरव के, माटी के तन में हम रहते सने ...
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