उपहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
उपहार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, जून 22

दिन-एक उपहार


दिन-एक उपहार  

 मिला है 

उपहार की तरह 

दिन आज का

लिपटा हुआ 

एक चमकीले आवरण में 

हम मुग्ध हैं उसी पर 

खोलना नहीं चाहते 

रख देते हैं आलमारी में 

रंगीन पैकेट्स में बंद 

पड़े हैं जहाँ कई 

अनखुले उपहार पहले के 

यदि खोल दिया होता 

एक नया दिन उपहार की तरह 

जाने क्या निकला होता 

भर देता उल्लास से

 हमारे अंतर को 

या किसी और के 

अगर थमा देते उसे ही 

स्वयं के लिए कुछ करें या औरों के 

बात तो एक ही है 

यहाँ सभी जुड़े हैं भीतर से 

ग्रह अलग-अलग हों ब्रह्मांड में

 आकाश तो एक ही है !


सोमवार, अप्रैल 22

एकांत

एकांत  

उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक

धरा के इस छोर से उस छोर तक

कोई दस्तक सुनाई नहीं देती

जब तक सुनने की कला न आये 

वह कर्ण न मिलें  

 सुन लेते हैं जो मौन की भाषा 

 जहां छायी है 

अटूट निस्तब्धता और सन्नाटा

वहीं गूंजता है 

अम्बर के लाखों नक्षत्रों का मौन हास्य 

और चन्द्रमा का स्पंदन  

मिट जाती हैं दूरियाँ

हर अलगाव हर अकेलापन

जब मिलता है उसका संदेशा 

एक अनमोल उपहार  सा

और भरा जाता है एकांत 

मृदुल प्यार सा  !


सोमवार, जनवरी 16

इक विश्वास हृदय में अनुपम

इक विश्वास हृदय में अनुपम 


जीवन इक उपहार उसी का 

जो सदा निकट, है सुदूर अति, 

जिससे यह श्वासें चलती हैं 

प्राणों में बल, तन-मन में गति !


जीवन ज्यों स्वीकार सभी का 

सुख-दुःख बारी-बारी बरसे, 

 दिवस बिना भला कैसी रात्रि 

स्मित अधरों पर, अश्रु नयन में !


जीवन है इज़हार प्रेम का 

 घटता-बढ़ता नहीं मोह सम, 

एक अचल मृदु आश्रय कोई 

इक विश्वास हृदय में अनुपम !


जीवन शुभ व्यापार प्रकृति का 

 शीत कँपाए, ग्रीष्म सताए,  

ऋतु बहार, फिर पतझड़ लाती  

बादल बारिश राग सुनाए !


जीवन इक उपकार किसी का 

कोई दाना, वस्त्र उगाए, 

दिया ज्ञान, घर-द्वार बनाता 

पग-पग नया सहायक आए !


शनिवार, दिसंबर 4

सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी


सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी 


समय पे सोना औ' जागना 

बात-बात पर दुखी न होना, 

थोड़ा सा ही पौष्टिक भोजन 

आसन, प्राणायाम साधना !


दर्द कभी हो कहीं देह में 

यह तन की पुकार है सुनना,  

उलझे से हों ग़र विचार तो 

यह मन का विकार है गुनना !


क्रोध जगे तो ज़रा ठहरना 

वातावरण प्रदूषित करता, 

गहरी चंद सहज श्वासें ले

अंतर्मन को ख़ाली करना !


जीवन एक उपहार प्रभु का 

सत्यम शिव सुंदर जब होगा, 

मन उत्साहित शरीर ऊर्जित 

हर पल तब ही सुखद बनेगा !





सोमवार, जुलाई 9

पुत्र के जन्मदिन पर




 माँ का उपहार 
पिता ने कहा कुछ दिन पहले
जन्मदिन आ रहा है तुम्हारा, क्या भेजें !
परमात्मा ने दिया है सब कुछ तुम्हें
सोचा, भेजते हैं थोड़ी सी दुआएं
दुआएं.. जो दूर तक साथ जाती हैं
जब घना हो अँधेरा तब उम्मीद का दीप जलाती हैं
इसी तरह खिला रहे मृदु मुस्कान से चेहरा तुम्हारा
हर कदम पर बनो एक-दूजे का सहारा
मित्रों संग खेलो-खिलखिलाओ
गमलों में कुछ और गुलाब उगाओ
इस शुभ दिन पर थोड़ा ध्यान भी करो
किसी जरूरत मंद को जाकर कुछ दान भी करो
सुबह उठकर शुक्रिया करना हर उस शख्स का
जिसकी वजह से आज तुम्हें यह मुकाम है मिला
पूर्वजों को याद करना, अपनों से आशीष लेना
मित्रों संग भोज कर, नव सृजन का स्वप्न देखना


गुरुवार, दिसंबर 29

नया वर्ष भर झोली आया


नया वर्ष भर झोली आया 

मन  निर्भार हुआ जाता है 

अंतहीन है यह विस्तार,
हंसा चला उड़ान भर रहा 
खुला हुआ अनंत का द्वार !

मन श्रृंगार हुआ जाता है 

नया-नया ज्यों फूल खिला हो,
पंख लगे सुरभि गा आयी 
हर तितली को संदेश मिला हो !

मन उपहार हुआ जाता है 

बीत गया जो भी जाने दें,
नया वर्ष भर झोली आया 
  खुलने दें पट नव क्षितिजों के !  

मन मनुहार हुआ जाता है 

रूठ गये जो उन्हें मना लें,
सांझी है यह धरा सभी की 
झाँक नयन संग नगमे गा लें ! 

मन बलिहार हुआ जाता है 

पंछी के सुर, नदिया का जल,
पलकों की कोरें लख छलकें 
हरा-भरा सा भू का आंचल  !




गुरुवार, जुलाई 10

इंगित हर शै तुझको करती

इंगित हर शै तुझको करती



कैसे हो अभिसार हमारा !

तुम वासी हो नीलगगन के
उस अपंक निरभ्र नीरव के,
माटी के तन में हम रहते
सने पंक में उड़ ना पाते !

कैसे उर स्वीकार हमारा !

 अभिराम ! वैकुंठ निवासी
छलते अविरत निज माया से,
अर्घ्य चढ़ाता भक्त बना जो
डर जाता है निज छाया से !

हो कैसे उद्धार हमारा !

अर्थाकुल उर प्रश्न पूछता
उपालम्भ भी एक लिए है,
कृपा का बादल बरस रहा जब
अवलम्ब क्यों और दिए हैं !

किस पर है अधिकार हमारा !

इंगित हर शै तुझको करती
आर्त हुआ हर उर यह जाने,
किन्तु भुलावे में रख स्वयं को
उन्मन सा हर दुःख को माने !

जीवन है उपहार तुम्हारा !