मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
मंगलवार, अगस्त 8
सत्य
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सत्य सत्य को छोड़कर हम चैन से जी नहीं सकते असत्य कितना भी मोहक हो विष में बदल जायेगा यह जानते हुए उसे पी नहीं सकते हिंसा असत्य से उपजी ...
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शुक्रवार, अगस्त 4
ख़ुद को ही
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ख़ुद को ही कोई ओट दे देगा उढ़का देगा बाती या तेल भर देगा दीपक में पर जलना तो ख़ुद को ही पड़ता है ! कोई मार्ग दिखा देगा लक्ष्य की पहचा...
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मंगलवार, अगस्त 1
तुम्हारे बारे में
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नाटक- तुम्हारे बारे में लेखक व निर्देशक- मानव कौल जीवन आने अनेक रूपों में हमारे सम्मुख आता है। हर दिन कुछ न कुछ नया अनुभव दे जाता है। प्रतिद...
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सोमवार, जुलाई 31
खुले न द्वार हृदय का जब तक
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खुले न द्वार हृदय का जब तक जीवन चिर बसंत सा मिलता यदि कोई बाधा मत डाले, सुरभित ब्रह्मकमल सा खिलता आत्ममुग्धता ग़र तज डाले ! दिग दिगंत ...
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शनिवार, जुलाई 29
मन का कैनवास
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मन का कैनवास सिकुड़ जाता है मन का चोला तो घुटने लगती हैं श्वासें और जन्म होता है हिंसा का शायद आत्मरक्षा में मन घायल करता है पहले स्वय...
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मंगलवार, जुलाई 25
पुरनम सी यह हवा
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पुरनम सी यह हवा तेरा पता मिला है औरों से क्या मिलें पहुँचेंगे तेरे दर अरमान ये खिलें तुझे छू के आ रही पुरनम सी यह हवा सब को मेरी दुआ से मिलन...
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शनिवार, जुलाई 22
ऐसा एक मिलन था अद्भुत
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ऐसा एक मिलन था अद्भुत प्रिय ब्लॉगर मित्रों, बरसों पहले घर में परिवार के सभी लोग इक्कट्ठे हुए, जब एक कुनबा एक साथ होता है तो कई नई यादें मनों...
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शुक्रवार, जुलाई 21
अक्सर
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अक्सर हम जिससे बचना चाहते हैं बच ही जाते हैं जैसे कि कर्त्तव्य पथ की दुश्वारियों से अपने हिस्से के योगदान से कुछ भी न करके हम पाना चाहत...
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बुधवार, जुलाई 19
आत्मा का फूल
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आत्मा का फूल जहां प्रमाद है वहाँ अहंकार है जहां अहंकार है वहाँ प्यार नहीं जहां प्यार नहीं वहाँ राग-द्वेष है अर्थात वे दो असुर जिन्होंने...
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सोमवार, जुलाई 17
एक बांसुरी की सरगम दिल
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एक बांसुरी की सरगम दिल बस कशमकश है ज़िंदगी, या प्रीत रागिनी मधुर बज रही, क्यों इसको संघर्ष बनाते निशदिन रस की धार बह रही ! सुरमई साँझ, क...
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