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शरद
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शरद
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शुक्रवार, जुलाई 7
शरद की एक शाम
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शरद की एक शाम भीगी-भीगी दूब ओस से हरीतिमा जिसकी मनभाती, शेफाली की मोहक सुवास झींगुर गान संग तिर आती ! शरद काल का नीरव नभ है रिक्त मेघ से, दर...
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शनिवार, अप्रैल 8
मिलन
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मिलन एक कदम बढ़ाओ तो वह हज़ार कदमों से चलकर आता है आवाज़ लगाने भर की देर है भेज देता है देवदूत सा कोई जन जिसका सान्निध्य शीतल जल और अ...
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गुरुवार, नवंबर 12
लो फिर आयी विमल दीवाली
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लो फिर आयी विमल दीवाली जगमग दीप जले पंक्ति में बन्दनवार लगे हर द्वारे सजी दिवाली महके जन पथ तोरण सजे गली चौबारे उठी सुगन्ध गुजिया, म...
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सोमवार, नवंबर 19
पारिजात क्यों झर जाते हैं
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फूलों, रंगों, झरनों वाले, क्यों भाते हैं गीत तू बसता है इनमें स्वयं ही, तू जो सबका मीत ! कुहू कुहू कूजन वूजन सब तुझसे...
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गुरुवार, अक्टूबर 14
शरद की एक संध्या
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शरद की एक साँझ भीगी-भीगी दूब ओस से हरीतिमा जिसकी लुभाती शेफाली की मोहक सुरभि झींगुर गान सँग तिर आती I शरद काल का नीरव नभ है रिक्त मे...
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