मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

मंगलवार, जनवरी 4

अब लौट मुझे घर आना है

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अब लौट मुझे घर आना है  हर भाव तुझे अर्पित मेरा  हर सुख-दुःख भी तुझसे संभव,  यह ज्ञान और अज्ञान सभी  तुझ एक से प्रकटा है यह भव ! तू बुला रहा ...
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रविवार, जनवरी 2

खोया नहीं है जो

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खोया नहीं है जो  खोया नहीं है जो  खोया हुआ सा लगता है  जैसे शशि झील में  सोया हुआ सा लगता है  न ही दूर गया उससे  न  जा सकता है बाहर  कोई बीज...
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गुरुवार, दिसंबर 30

नए वर्ष में नए स्वप्न हों

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नए वर्ष में नए स्वप्न हों  उजाला ही उजाला हर सूँ  हम आँखें मूँदे बैठे है,  प्रकृति-पुरुष का नर्तन चलता  हम अँधियारे में बैठे हैं ! शिव का ता...
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मंगलवार, दिसंबर 28

हो निशब्द जिस पल में अंतर

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हो निशब्द जिस पल में अंतर शब्दों से ही परिचय मिलता उसके पार न जाता कोई, शब्दों की इक आड़ बना ली कहाँ कभी मिल पाता कोई !   ऊपर-ऊपर यूँ लगता ह...
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शनिवार, दिसंबर 25

संकरा है वह द्वार प्रभु का

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संकरा है वह द्वार प्रभु का क्रिसमस उसकी याद दिलाता जो भेड़ों का रखवाला था, आँखें करुणा से नम रहतीं मन जिसका मद मतवाला था ! जो गुजर गया जिस घड़...
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गुरुवार, दिसंबर 23

अभी मिलन घट सकता उससे

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अभी मिलन घट सकता उससे   ना  अतीत जंगल के उगते   ना उपवन भावी के जिसमें,  वर्तमान का पुष्प अनोखा  खिलता उसी मरूद्यान में ! एक स्वप्न से क्या ...
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शनिवार, दिसंबर 18

सन्नाटे का पुष्प अनोखा

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सन्नाटे का पुष्प अनोखा  खो जाते हैं प्रश्न  सभी का  इक ही उत्तर जब मिलता है,  सन्नाटे का पुष्प अनोखा  अंतर्मन में तब खिलता है ! उर नि:शब्द, ...
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गुरुवार, दिसंबर 16

जीवन मिलता है पग-पग पर

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जीवन मिलता है पग-पग पर  एक शृंखला चलती आती  अंतहीन युग बीत गए हैं,  इच्छाओं को पूरा करते  हम खुद से ही रीत गये हैं ! प्रतिबिंबों से आख़िर कब...
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शनिवार, दिसंबर 11

अपने दिल का द्वार खोल दें

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अपने दिल का द्वार खोल दें आज वक्त से वादा कर लें  नव विश्वास आस नव भर लें,  हर सिलवट को झाड़ मनों से  जीवन पथ उजियाला कर लें ! चंद घड़ी जो प...
15 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, दिसंबर 7

संध्या बेला

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संध्या  बेला   तमस की काली रात्रि  अथवा रजस का उजला दिन  दोनों रोज ही मिलते हैं  अंधकार और प्रकाश के  इस खेल में हम नित्य ही स्वयं को छलते ह...
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सोमवार, दिसंबर 6

एक अमिट मुस्कान छिपी है

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एक अमिट मुस्कान छिपी है  एक अमिट मुस्कान छिपी है  उर अंतर की गहराई में,  वह मनमोहन यही चाहता  उसे खोज लें फिर बिखरा दें ! चलना है पर चल न पा...
11 टिप्‍पणियां:
शनिवार, दिसंबर 4

सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी

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सेहत का है राज यही, नहीं भूलना इन्हें कभी  समय पे सोना औ' जागना  बात-बात पर दुखी न होना,  थोड़ा सा ही पौष्टिक भोजन  आसन, प्राणायाम साधना...
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मंगलवार, नवंबर 30

हम खुद में कितने रहते हैं

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हम खुद में कितने रहते हैं  गौर किया है कभी ठहर कर  इत-उत क्यों डोला करते हैं  कभी यहाँ का कभी वहाँ का  हाल व चाल लिया करते हैं  बस खुद का ही...
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सोमवार, नवंबर 29

चाहे तो

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चाहे तो  कभी कुछ भी नहीं बिगड़ता इतना कि सुधारा ही न जा सके  एक किरण आने की  गुंजाइश तो सदा ही रहती है ! माना  कि अंधेरों में कभी  विष के बी...
10 टिप्‍पणियां:
रविवार, नवंबर 28

कहानी एक दिन की

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कहानी एक दिन की दिनकर का हाथ बढ़ा उजियारा दिवस चढ़ा, अंतर में हुलस उठी दिल पर ज्यों फूल कढ़ा ! अपराह्न की बेला किरणों का शुभ मेला, पढ़कर घर लौट ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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