गुरुवार, जनवरी 22

है हवा कुछ बोलती सी

 है हवा कुछ बोलती सी




गंध ले आयी सुमन की
भरे आंचल डोलती सी,
नीर नद की कुछ नमी
राज कोई खोलती सी
है हवा कुछ बोलती सी !

कर रही सरगोशियाँ ये
तोडती खामोशियाँ ये.
उड़ चली पाखी के पंखों
राह उनकी मोड़ती सी
है हवा कुछ बोलती सी !


8 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर सुमधुर ....मंद पवन के झोंके सा !!

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  2. बहुत सुन्दर....
    काश हम समझ पाते हवा की बोली......
    :-)

    सादर
    अनु

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    1. स्वागत व आभार अनुपमा जी व अनु जी...

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  3. पिछली टिप्पणी मे तारीख की गलती के लिए क्षमा चाहता हूँ।

    कल 24/जनवरी/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  4. वसन्त की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें !........खूबसूरत रचना!

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.....
    गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ।

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