सोमवार, जनवरी 5

कोई मतवाला मंजिल तक

कोई मतवाला मंजिल तक



फूल उगाये जाने किसने
गंध चुरायी है सबने,
स्वेद बहाया जाने किसने
स्वप्न सजाये हैं सबने !

कोई मतवाला मंजिल तक
जाने का दमखम रखता,
पीछे चले हजारों उसके
घावों पर मरहम रखता !

राह बनायी जाने किसने
कदम अनेकों के पड़ते,
देख उसे ही तृप्त हो रहे
पहुँचेगे, किस्से गढ़ते !

एकाकी ही लक्ष्य बेधता
भीड़ें सभी बिखर जातीं,
जीवन को सतह पर छूकर
तृप्त हुईं निज घर जातीं !

स्वर्णिम कलश सा कोई चमके
आभा मंडित सब होते,
उसको हमने भी देखा है
दर्शन पाये यह कहते !

7 टिप्‍पणियां:

  1. एकाकी ही लक्ष्य बेधता
    भीड़ें सभी बिखर जातीं,
    जीवन को सतह पर छूकर
    तृप्त हुईं निज घर जातीं !

    .... सत्य को बहुत ही सुन्दरता से उकेरा है…………सुन्दर रचना।

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  2. कल 08/जनवरी/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  3. संजय जी, राजीव जी, यशवंत जी, माहेश्वरी जी व प्रतिभा जी, आप सभी का स्वागत व आभार !

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  4. किसी न किसी को तो आगे आना ही पड़ता है,और फिर कारवां बन जाता है ,भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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