बुधवार, जनवरी 28

मन की बात

मन की बात


मन की बात कही आपने,
मन की बात सुनी सभी ने !

सुन कर इसको गुनना होगा,
स्वप्न नया फिर बुनना होगा !

सबको सम अधिकार मिलेंगे,
जब बेटा बेटी दोनों खिलेंगे !

प्रगतिशील बनेगा जन जन,
शक्ति प्रकटेगी हर तन मन !

दुनिया के दो गणतन्त्र मिल,
राह दिखायें पा लो मंजिल !

विश्व बने सबका परिवार,
प्यार बढ़े न हो तकरार !

निज भूमिका सभी निभाएं,
जीवन को इक पर्व बनाएं !


4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सार्थक अभिव्यक्ति...

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  2. बहुत उम्दा....बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो
    मुकेश की याद में@चन्दन-सा बदन

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  3. कैलाश जी व प्रसन्न जी, स्वागत व आभार !

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  4. मन के सच्चे भावों की प्रस्तुति....

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