शुक्रवार, मई 13

गुरूजी के जन्मदिन पर


गुरूजी के जन्मदिन पर


शब्द नहीं ऐसे हैं जग में
जो तेरी महिमा गा पायें,
भाव यदि गहरे भी हों तो
व्यक्त हृदय कैसे कर पायें !  

तू क्या है यह तू जानता
अथवा तो ऊपरवाला ही,
क्या कहती मुस्कान अधर की
जाने कोई मतवाला ही !

जाने कितने राज छिपाए
मंद-मंद हँसती दो ऑंखें,
अन्तरिक्ष में उड़ता फिरता
मन मनहर लगा नव पांखें !

सबके कष्ट हरे जाएँ बस
यही बसा दिल में तेरे है,
सबके अधर सदा मुस्काएं
गीत यही तूने टेरे हैं !

लाखों जीवन पोषित होते
करुणा सहज भिगोती मन को,
हाथ हजारों श्रम करते हैं
सहज प्रेरणा देती उनको !

तेरा आना सफल हुआ है
भारत का भाल दमकाया,
नेहज्योति जला कर जग में
 खुशियों का उजास फैलाया !



5 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " हिंदी भाषी होने पर अभिमान कीजिये " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. स्वागत व आभार शिवम जी !

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  3. बहुत सुन्दर गुरु गान ..

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  4. कविता जी व ओंकार जी, स्वागत व आभार !

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