मंगलवार, मार्च 19

अगन होलिका की है पावन




अगन होलिका की है पावन

बासंती मौसम बौराया
मन मदमस्त हुआ मुस्काया,
फागुन पवन बही है जबसे
अंतर में उल्लास समाया !

रंगों ने फिर दिया निमंत्रण
मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन,
जल जाएँ सब क्लेश हृदय के
अगन होलिका की है पावन !

जली होलिका जैसे उस दिन
जलें सभी संशय हर उर के,
शेष रहे प्रहलाद खुशी का
मिलन घटे उससे जी भर के !

उड़े गुलाल, अबीर फिजां में
जैसे हल्का मन उड़ जाये,
रंगों के जरिये ही जाकर
प्रियतम का संदेशा लाए !

सीमित हैं मानव के रंग
पर अनंत मधुमास का यौवन,
थक कर थम जाता है उत्सव
चलता रहता उसका नर्तन !


28 टिप्‍पणियां:

  1. सच हिया मधुमास अपने नए नए रंगों से नित नै होली खेलता रहता है ... अंत साँसों का ही होता है ... उत्सव भी तो वहीं है "मन पाए विश्राम जहाँ"

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्वागत व आभार दिगम्बर जी, होली की शुभकामनायें !

      हटाएं
  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  4. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 19/03/2019 की बुलेटिन, " किस्मत का खेल जो भी हो “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
  5. होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
    नयी पोस्ट: मंदिर वहीं बनाएंगे।
    iwillrocknow.com

    जवाब देंहटाएं
  6. आपकी लिखी रचना आज ," पाँच लिंकों का आनंद में " बुधवार 20 मार्च 2019 को साझा की गई है..
    http://halchalwith5links.blogspot.in/
    पर आप भी आइएगा..धन्यवाद।

    सूचना में तारीख गलत थी..इसलिए पुनः

    जवाब देंहटाएं
  7. होली पर ढेरों शुभकामनाएं!

    जवाब देंहटाएं
  8. जली होलिका जैसे उस दिन
    जलें सभी संशय हर उर के,
    शेष रहे प्रहलाद खुशी का
    मिलन घटे उससे जी भर के !
    बहुत ही सुंदर अनीता जी,होली की हार्दिक शुभकामनाये

    जवाब देंहटाएं
  9. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 21.3.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3281 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  10. होली की सपरिवार शुभकामना।
    - पूनम और विश्वमोहन

    जवाब देंहटाएं
  11. रंगों ने फिर दिया निमंत्रण
    मुक्त हो रहो तोड़ो बंधन,
    जल जाएँ सब क्लेश हृदय के
    अगन होलिका की है पावन !
    बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  12. जली होलिका जैसे उस दिन
    जलें सभी संशय हर उर के,.....वाह अनीता जी क्‍या खूब लिखा है

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत ही लाजवाब रचना...
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं