शनिवार, मार्च 2

जिन्दगी का गीत मिलकर


जिन्दगी का गीत मिलकर


सादगी हो जिन्दगी में
दिलों में थोड़ी शराफत,
दिन कयामत अगर आये
खुशदिली से करें स्वागत !

नफरतों की बात ना हो
दूरियां मिट जाएंं दिल से,
प्यार के किस्से कहेंं फिर
फूल बन मुस्काएं खिल के !

'शुक्रिया' हर साँस में हो
 हर दिल से बन दरिया बहे,
इश्क की ही जीत होगी
हर शब्द अपना यह कहे !

सुख की ही चाहत जगे न 
दुःख से न नजरें चुराएँ,
जिन्दगी का गीत मिलकर
हर जुबां में गुनगुनाएं !

आज दिल में उठे ख्वाहिश
 दोस्ती हो जंग ना हो,
खूबसूरत इस जहाँ में
बेरुखी का रंग न हो !

11 टिप्‍पणियां:

  1. सादगी हो जिन्दगी में
    दिलों में थोड़ी शराफत,
    सीधे दिल से की गयी भावुक मन की अभिव्यक्ति!

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन भारत कोकिला सरोजिनी नायडू और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  3. बहुत सुंदर और सारगर्भित अभिव्यक्ति...

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  4. कितना सार्थक और आशा का भाव है इन पंक्तियों में ...
    सच है हर स्थिति का स्वागत को दिल से उसको ग्रहण किया जाए तो जीवन भी सार्थक है ... मायने मिल जाते हैं उसे ... अनुपम रचना ...

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