रविवार, जून 14

दुख की तुम गाथा सुनाते

दुख की तुम गाथा सुनाते


दो दिनों के बीच में इक रात आती 

रात का तुम ज़िक्र करते 

दिन तुम्हारे पास था 

दिन कभी गाया नहीं !


दो सुखों के बीच था इक दुख पिरोया 

दुख की तुम गाथा सुनाते 

सुख तुम्हारे पास था 

सुख कभी गाया नहीं !


जो नहीं है पास उसकी राह तकते

जो मिला वह याद कब है 

ज़िंदगी ने जो दिया

वह कभी गाया नहीं !


जो करेगा जिगर रोशन होश है वह 

भूल जाओ क्या कमी है  

मुक्त होकर आज जी लो 

कल कभी आया नहीं !

 

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