दुख की तुम गाथा सुनाते
दो दिनों के बीच में इक रात आती
रात का तुम ज़िक्र करते
दिन तुम्हारे पास था
दिन कभी गाया नहीं !
दो सुखों के बीच था इक दुख पिरोया
दुख की तुम गाथा सुनाते
सुख तुम्हारे पास था
सुख कभी गाया नहीं !
जो नहीं है पास उसकी राह तकते
जो मिला वह याद कब है
ज़िंदगी ने जो दिया
वह कभी गाया नहीं !
जो करेगा जिगर रोशन होश है वह
भूल जाओ क्या कमी है
मुक्त होकर आज जी लो
कल कभी आया नहीं !
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