शनिवार, जून 6

चिंगारी प्रेम की

 चिंगारी प्रेम की 

प्रेम कविताएँ और कहानियाँ 

पढ़ी जाती हैं, रची जाती हैं, सुनायी जाती हैं 

क्योंकि प्रेम की जो नन्हीं सी चिंगारी 

छिपी है हरेक मन में 

उसे हवा देकर पल भर को सुलगाती हैं 

या कोई मन छिपाये हो भीतर

 प्यार की सुवास 

वह बिखर जाती है

 किसी अनजान पल में 

जब वह सचेत नहीं है 

रक्षा नहीं कर रहा है 

पहरे पर नहीं खड़ी है बुद्धि 

प्रेम कहो, सुनो या पढ़ो 

यदि रच नहीं सकते 

निज जीवन में भी प्रेम का बसंत छायेगा 

इन्हीं नयनों से इंतज़ार किया था 

सपनों से भरा था मन का आँगन 

वह पुन: नज़र आएगा 

प्रेम पावन है 

क्योंकि प्रेम दान है 

पूजा है अर्पण है ! 

 

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