शुक्रवार, जून 12

राहे जिंदगी में

राहे जिंदगी में

न तू है न मैं बस एक ख़ामोशी है
इश्क की राह पर यह कैसा मोड़ आया

न ख्वाहिश मिलन की न विरह का दंश
राहे जिंदगी में कैसा मुकाम आया

एक ठहराव सा कोई सन्नाटा पावन
सफर में यह अनोखा इंतजाम पाया

पत्ते-पत्ते पर लिखी है कहानी जिसकी
हर श्वास पर उसी का अधिकार पाया 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को शनिवार, १३ जून, २०१५ की बुलेटिन - "अपना कहते मुझे हजारों में " में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद। जय हो - मंगलमय हो - हर हर महादेव।

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, पढ़कर अच्छा लगा

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  3. एक ठहराव सा कोई सन्नाटा पावन
    सफर में यह अनोखा इंतजाम पाया
    ...जीवन यात्रा का एक अनोखा मोड़...दिल को सुकून देती बहुत सुन्दर रचना...

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  4. पत्ते-पत्ते पर लिखी है कहानी जिसकी
    हर श्वास पर उसी का अधिकार पाया
    एक सार्थक सोच और प्रस्तुति

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