रविवार, सितंबर 2

कृष्ण जन्म


कृष्ण जन्म 

यह तन कारागार है अहंकार है कंस
पञ्च इन्द्रियाँ संतरी भीतर बंदी हंस !

बुद्धि हमारी देवकी मन-अंतर वसुदेव
इन दोनों का मिलन बना आनंद का गेह !

प्रहरी सब सो गए इन्द्रियाँ हुईं उपराम
हृदय बुद्धि में खो गया भीतर प्रकटे श्याम !

अविरति है कालिंदी पार है गोकुल धाम
मिटा मन का राग तो खुद आया घनश्याम !

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