करीब उसके ख़ुदा होता है
जो भी ‘खुद’ से जुदा होता है
करीब उसके खुदा होता है
बनी रहेगी जब तक भी ‘खुदी’
मिलन किसी से कहाँ होता है
अभी मिलन फिर बिछड़ना खुद से
तब ‘उसका’ सिलसिला होता है
उलट दो ‘खुद’ बन जाता है ‘दुख’
अरूप रूबरू तब होता है
सुख के पीछे खड़ा था खुस(खुश)
सुकून जिसके निकट होता है
माया हर्फों की जहां सारा
‘चुप’ में वह रब बसा होता है
करीब वही है सबसे उसके
दिल में जिसके फना होता है

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