बुधवार, जुलाई 1

एक सनातन वृक्ष जगत है

एक सनातन वृक्ष जगत है

क़ुदरत में ही सदा अवस्थित

सुख-दुख रूपी फल लगते हैं,

त्रिगुण रूपी मूल अति  गहरी 

एक सनातन वृक्ष जगत है !

 

पंच भूत, मन, बुद्धि, अहंता  

सदा अष्ट शाखाओं वाला

सप्त धातुएँ छाल बनी हैं

एक सनातन वृक्ष जगत है !

 

नौ द्वारों के कोटर इसमें 

दस प्राण बने पत्ते जिस पर

रस देता पुरुषार्थ रूप में

एक सनातन वृक्ष जगत है !

 

पंच इन्द्रियों से हम जानें  

उत्पन्न होकर बढ़े व मिटे

दो पंछी रहते हैं जिस पर

एक सनातन वृक्ष जगत है !


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें