बुधवार, मई 23

भाभियाँ


भाभियाँ

माँ की तरह इसरार करके
तवे से उतारे
ताजे फुलके खिलातीं
और सफर हेतु
टिफिन पैक कर
छोटी सी डिबिया में
आम के अचार की
दो फांकें रखना
नहीं भूलतीं

शांत स्निग्ध मुस्कान देकर
स्वागत व विदा करतीं
मेहमानों से परिचय करातीं

प्रातः भ्रमण को जातीं  
भाई के सँग
मनपसंद धारावाहिक देखतीं
बिटिया को रस पगे
शब्दों से मनातीं
भजन व पूजा में मग्न
भाव पूर्ण नजर आतीं बड़ी भाभी !

सुबह सवेरे गर्मागर्म नाश्ता
फलों की प्लेट
और सजा हुआ घर...
दीवारों पर कलात्मक छाप छोड़तीं
और मधुर शब्दों से
प्रेम का इजहार करतीं
मनुहार भरे शब्दों से
जगातीं बिटिया को  
भाई के दिल की धड़कन है
मझली भाभी !

गोल, गंदुमी चेहरे पर
चमकती, बड़ी सी लाल बिंदी
और प्यारी सी मुस्कान उन्हें  
विशिष्ट बनाती है....

जोश भरे युवा बेटियों का सा
ओशो की सूक्तियां
जो यदा-कदा दोहराती हैं
प्रेमिल व्यवहार से
सबका मन मोहती

मेहमानों का स्वागत करती
सजग सदा स्वास्थ्य के प्रति
भाई का मन बिना कहे
समझ जाती हैं
छोटी भाभी !
  


19 टिप्‍पणियां:

  1. एक अलग ही रंग उतारा है इस बार्………बहुत सुन्दर्।

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  2. बहुत सुन्दर भाव ...नारी का एक roop यह भी है .आभार

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    1. सचमुच नारी अपने हर रूप में सुंदर है.

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  3. तीन - तीन भाभियाँ वो भी इतनी अच्छी माँ जैसी बहुत भाग्यशाली हैं आप. आप जैसी ननद पाकर वो भी इतनी ही खुश होंगी... सुन्दर रचना के लिए आभार

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    1. संध्या जी,सचमुच ईश्वर की कृपा है...आभार!

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  4. मायेका याद आ गया....
    मन भीग गया...
    बहुत सुंदर अनीता जी
    सादर.

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    1. अनु जी, मायका हर नारी के मन के बहुत करीब होता ही है..

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  5. भाभी माँ के हाथ की, पूरी साग अचार |
    स्नेहसिक्त पा भोग को, खाय मार चटकार |

    खाय मार चटकार, बड़ी बढ़िया है भाभी |
    बनी मूल आधार, सभी भैया की चाभी |

    मइके का यह प्रेम, पाइए हरदम जाके |
    माँ का स्वास्थ्य शिथिल, जाइए भाभी माँ के ||

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    1. रविकर जी, आपने बहुत सुंदर दोहों में अपनी प्रतिक्रिया लिखी है, माँ अब रही नहीं इसलिए भाभी में ही माँ नजर आती हैं.

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  6. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  7. तीन अलग अलग रूपों में दिखती एक छवि .....माँ की......बहुत सुन्दर पोस्ट।

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  8. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

    आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

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  9. बहुत सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति!

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  10. आप और आपकी भाभियाँ खुशकिस्मत है !
    सत्या है कि ये रिश्ते संभाल जाए तो माँ से कम नहीं !

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  11. भांति भांति के रंग हैं, क्या सुंदर उदगार।
    इन्द्रधनुष जिनसे खिला, वो भारत की नार।

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  12. in bhabhiyon ki betiya aur nande aur saas kitna sukhmay jiwan jiti hain is rachna se anumaan lagana aasaan hai.

    sunder chhata bikherti.

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