सोमवार, मई 14

पले वहाँ विश्वास का मोती


पले वहाँ विश्वास का मोती


संभल संभल के चलने वाला
गिरने से तो बच जायेगा,
गिरकर भी जो संभल गया
उसका गौरव न पायेगा !

पूर्ण बने कोई इस जग में
इसकी नहीं जरूरत उसको,
हृदय ग्राही, निष्ठावान हो
मंजिल की चाहत हो जिसको !

दोराहे हर मोड़ मिलेंगे
मुँह बाएं है खड़ी चुनौती,
हंसकर झेले तब जो उसको
पले वहाँ विश्वास का मोती !

नहीं परीक्षा लेता रब भी
जिसके कदमों में न बल है,
ठोंक-पीट कर उसको देखे
जिसमें बढ़ने का सम्बल है !

जिसको ऊपर ही जाना है
मुड़-मुड़ कर न पीछे देखे,
इस उलझन में गिर सकता वह
जिसकी राह में सुंदर लेखे ! 

10 टिप्‍पणियां:

  1. दोराहे हर मोड़ मिलेंगे
    मुँह बाएं है खड़ी चुनौती,
    हंसकर झेले तब जो उसको
    पले वहाँ विश्वास का मोती !
    वाह!

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  2. प्रेरणा देने वाली सारगर्भित कविता .
    नहीं परीक्षा लेता रब भी
    जिसके कदमों में न बल है,
    ठोंक-पीट कर उसको देखे
    जिसमें बढ़ने का सम्बल है ! क्या खूब कहा है.

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  3. बहुत सुंदर...
    सच है ईश्वर भी उसी की परीक्षा लेता है जो इस लायक हो...

    सादर.

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  4. नहीं परीक्षा लेता रब भी
    जिसके कदमों में न बल है,
    ठोंक-पीट कर उसको देखे
    जिसमें बढ़ने का सम्बल है !


    सही कहा.....!!
    सुंदर कविता....!!!

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  5. मनोज कुमार ने आपकी पोस्ट " पले वहाँ विश्वास का मोती " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    गूढ़ ज्ञान की बातें सहज-सरल शब्दों में मन के भीतर समाती हैं।

    इस ब्लॉग के लिए टिप्पणियों को मॉडरेट करें.

    मनोज कुमार द्वारा मन पाए विश्राम जहाँ के लिए 15 मई 2012 4:47 pm को पोस्ट किया गया

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