सोमवार, अक्तूबर 5

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा 

प्रतीक्षा का एक मौन क्षण
जहाँ कोई स्पंदन नहीं
उसका द्वार है
प्रतीक्षा यदि मिली हो थकहार कर
तो मिल जाती है पगडंडी वह
जिस पर चलना नहीं होता
कदम रखते ही अहसास होता है
मंजिल का
प्रतीक्षा पावन है 

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रतिक्षा पावन है
    तो मंज़िल भी।

    शायद अहिल्या शायद सबरी।

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  2. प्रतीक्षा एक उम्मीद जगाये रखती है मंजिल को पाने की.

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