रक्षाबंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ
सावन के पूनम की बेला, संग लायी यादों का मेला
न केवल धागा कलाई पर, बँधता स्नेह,विश्वास निराला !
कभी समरभूमि में बहन ने, जय-तिलक संग राखी बाँधी
कभी संकट में इक पुकार पर, रिश्तों ने मर्यादा साधी !
इतिहास के पन्नों में मिलती, त्याग और साहस की कथाएँ
राखी की कच्ची डोरी ने, गढ़ डालीं कितनी गाथाएँ !
रक्त बहा कृष्ण की उँगली से, द्रौपदी ने आँचल फ़ाड़ा
उस छोटे से इक टुकड़े ने, दिया स्नेह का ऋण अनंत बढ़ा !
पर्व नहीं बस भाई-बहन का, मानवता का परम उत्सव है
जहाँ सुरक्षा के संग सदा, सम्मान का शुभ संकल्प है !
आज भले समय बदला है, बदल गई जीवन-परिभाषा,
पर राखी कहती चुपके से, प्रेम ही है जीवन की भाषा !
बहन की आँखों में विश्वास, भाई के मन सम्मान रहे,
हर नारी निर्भय हो जीए, हर घर में प्रेम का मान रहे !
आओ, इस बार राखी पर, सूत नहीं दिल भी बाँधें
भेदभाव की तोड़ दीवारें, मानवता के रिश्ते साधें !
राखी का धागा कच्चा है ,भाव अगर सच्चा हो जाए,
तो छोटी-सी प्रेम-गाँठ से, सारा जग अपना हो जाए !
रक्षा केवल रिश्तों की नहीं,संस्कारों, सम्मान की भी हो;
राखी का है यही संदेश, हर इक मन में अपनापन हो !
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