बुधवार, जुलाई 20

दिल से निकली एक दुआ

दिल से निकली एक दुआ

तुमको हर इक खुशी मिले बस इतनी सी ख्वाहिश है
पूर्ण चन्द्र से खिल जाओ दिल की यही गुजारिश है

वक्त पे जागो वक्त पे सोओ वक्त पे घर से आओ-जाओ
कैद नहीं करना है तुमको न ही कोई आजमाइश है

तुमको न पछताना पड़े न ही नजर झुकाना पड़े
याद सदा दिल में रखो दिल अल्लाह की पैदाइश है

सुख तो पीछे आयेगा छोड़ो तुम दुःख की फिक्रें
जिगरा अपना बड़ा करो यह रब की फरमाइश है

घुटनों-घुटनों चलते थे दौड़ लगाना सीख लिया
मंजिल तक भी पहुंचोगे न भटको यह सिफारिश है


20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह कितना सुन्दर लिखा है आपने, कितनी सादगी, कितना प्यार भरा जवाब नहीं इस रचना का........ बहुत खूबसूरत.......

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  2. घुटनों-घुटनों चलते थे दौड़ लगाना सीख लिया
    मंजिल तक भी पहुंचोगे न भटको यह सिफारिश है

    एक विशाल ह्रदय की अनमोल प्रार्थना ....
    अद्वितीय रचना ...
    बधाई ...
    man paaye vishraam yahan ...

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  3. सुख तो पीछे आयेगा छोड़ो तुम दुःख की फिक्रें
    जिगरा अपना बड़ा करो यह रब की फरमाइश है

    बेहतरीन पंक्तियाँ।

    सादर

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  4. तुमको हर इक खुशी मिले बस इतनी सी ख्वाहिश है
    पूर्ण चन्द्र से खिल जाओ दिल की यही गुजारिश है


    बहुत सुन्दर ||
    बधाई ||

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  5. घर से दूर रहने वाले हर बच्चे के लिए एक बेहतरीन दुआ.

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  6. बहुत खूब बच्चों को सीख भरा दुलार देती ये ग़ज़ल बढ़िया लगी|

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  7. आप सभी का तहेदिल से आभार!

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  8. एक माँ के ह्रदय से निकलती रचना. बहुत सुन्दर

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  9. बिना लाग लपेट के अपनी बात कहना बहुत अच्छा लगा , बधाई

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  10. कल 30/08/2011 को आपके दिल की बात नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. बहुत अच्छी रचना ....भावपूर्ण

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  12. बहुत सुन्दर और सार्थक सन्देश देती अच्छी रचना

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  13. तुमको न पछताना पड़े न ही नजर झुकाना पड़े
    याद सदा दिल में रखो दिल अल्लाह की पैदाइश है |
    बहुत खूबसूरत और सच्ची बात |

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  14. तुमको हर इक खुशी मिले बस इतनी सी ख्वाहिश है
    पूर्ण चन्द्र से खिल जाओ दिल की यही गुजारिश है...सुन्दर रचना....

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  15. आज आपका दिल धड़क रहा है नई पुरानी हलचल में यकीन नही तो खुद ही देखिये...  चर्चा में आज नई पुरानी हलचल

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  16. पूर्ण चन्द्र से खिल जाओ दिल की यही गुजारिश है...

    सुन्दर.... खुबसूरत रचन और कथन.... उम्दा ग़ज़ल...
    सादर....

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