मंगलवार, अगस्त 18

दिया जो पहले मिला वही

दिया जो पहले मिला वही


जो खाली है वही भरा है
सच ही सच ! न झूठ जरा है,
जो दिखता है.. वही नहीं है
नजर न आता वही वही है !

धरा दौड़ती.. थामे सबको
थिर दिनकर यात्री बनता,
दिया जो पहले मिला वही
मिटा यहाँ जो.. बचा वही !

शब्दों से प्यास नहीं बुझती,
नदिया पर जाना होता है,
पिंजरे से गगन नहीं मिलता
नभ में ही गाना होता है !   

3 टिप्‍पणियां:

  1. जो खाली है वही भरा है
    सच ही सच ! न झूठ जरा है,
    जो दिखता है.. वही नहीं है
    नजर न आता वही वही है !
    ...बहुत सुन्दर और सटीक चिंतन..जब तक मन राग द्वेष से खाली नहीं होगा तब तक प्रभु के लिए वहां स्थान कहाँ से होगा...उसको स्थान देने के लिए मन को खाली रखना ही होगा...

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  2. स्वागत व आभार कैलाश जी..

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