शुक्रवार, अगस्त 14

स्वतन्त्रता दिवस पर

स्वतन्त्रता दिवस पर

भर जाता है भीतर जोश
क्रम बद्ध उठने लगते हैं कदम
मन में दौड़ जाती है
यादों की एक लम्बी कतार
बचपन में गाये देशभक्ति के तराने
चंद्रशेखर आजाद और नेता जी के फसाने
 याद आते हैं हजारों अनाम शहीद  
घुल जाती है लड्डुओं की मिठास
समाती है उज्ज्वल भविष्य की आस
रश्क होता है भारत माँ की लालना पर
पुराणों, वेदों से की संस्कारित पालना पर
आत्मा सहज ही मुस्का उठती है
देख तिरंगे को लहराते  
आओ मिल कर मनाएं
 ‘स्वतन्त्रता दिवस’ हँसते-गाते 

8 टिप्‍पणियां:

  1. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आपको बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस पोस्ट को, १४ अगस्त, २०१५ की बुलेटिन - "आज़ादी और सहनशीलता" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद। जय हो - मंगलमय हो - हर हर महादेव।

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  2. सुंदर कविता से अनीता जी आपने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का प्राम्भ कार दिया है. इस अवसर पर आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनायें.

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  3. सचमुच इस दिन अनायास ही मन तरंगित होजाता है . अपने तिरंगे को लहराता देख हदय गर्व से भर जाता है . आपको इस पावन पर्व की हार्दिक बधाई .

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  4. रचना जी, गिरिजा जी, ओंकार जी, सुधीर जी, व कैलाश जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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