गणेश पूजा
फिर आयेंगे गणपति
कुछ दिनों के लिए
घर बन जाएँगे मंदिर
सुबह-शाम आरती के गूँजेंगे स्वर
बूढ़े बन जाएँगे बच्चे
बच्चे कुछ समझदार
महिलाएं जुट जायेंगी
मीठे मोदक करने तैयार
गणनायक की करुणा हर लेगी
मन का सूनापन
झर जाएगा हर विषाद
निर्मल होगा मन का दर्पण
आस्था की जीत होगी
झुक जाएगा चरणों में तन !
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