नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
राजे-दिल
माना दुःख-दर्द ढेरों हैं जमाने में
इश्क़ महके है अब भी हर फ़साने में
लोग तैयार हैं अदावतों की खातिर
लुत्फ़ आता है पर हँसने-हँसाने में
हर किसी से न कहना राजे-दिल अपना
सब माहिर यहाँ दूजों को सुनाने में
चंद लम्हों की फुर्सत निकालते रहना
वक्त लगता नहीं दिलों को भुलाने में