दुःख-दर्द लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दुःख-दर्द लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, अप्रैल 11

राजे-दिल



राजे-दिल

माना  दुःख-दर्द ढेरों हैं जमाने में 

इश्क़ महके है अब भी हर फ़साने में 

 

लोग तैयार हैं अदावतों की खातिर 

लुत्फ़ आता है पर हँसने-हँसाने में 

 

हर किसी से न कहना राजे-दिल अपना 

सब माहिर यहाँ दूजों को सुनाने में 

 

चंद लम्हों की फुर्सत निकालते रहना 

वक्त लगता नहीं दिलों को भुलाने में