रहें सदा दिल मिले हमारे
ज्योति जले ज्यों हर घर-बाहर
गलियाँ , सड़कें, छत, चौबारे,
मन में प्रज्ज्वलित स्नेह प्रकाश
रहें सदा दिल मिले हमारे !
घर-आँगन ज्यों स्वच्छ दमकते
कोना-कोना हुआ उजागर,
रिश्तों की यह मधुरिम डाली
निर्मल भावों से हो भासित !
सुस्वादु पकवानों की जहाँ
मीठी-मीठी गंध लुभाती,
आत्मीयता, अपनेपन की
धारा अविरल बहे सुहाती !
दीवाली का पर्व अनोखा
दीप, मिठाई, फुलझड़ियों का,
ले आता है पीछे-पीछे
सुखद उत्सव भाई दूज का !
तिलक भाल पर हँसी अधर पर
यह भंगिमा बहन को भाए,
दुआ सदा यह दिल से निकले
सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य सदा पाएँ !
