गुरुवार, अगस्त 9

मानो हुआ प्रेम साकार


कृष्ण जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनायें...

मानो हुआ प्रेम साकार

अति सुहाना समय हुआ था
शांत-सौम्य, सारा ब्रह्मांड,
चमक रहे थे झिलमिल तारे
दिशा स्वच्छ, निर्मल आकाश !

नदियों का जल निर्मल, शीतल
खिले हुए अनगिनत कमल,
शीतल, मंद, सुगन्धित वायु
रह-रह कर छूती यमुना जल !

गूंज उठा बालक के स्वर से
मथुरा का वह कारागार,  
सुंदर, श्यामल देह अनूठी
मानो प्रेम हुआ साकार !

कम्पित हुआ कंस भी होगा
पुत्र आठवाँ काल था उसका,
किये मूर्छित रक्षक सारे
ले आश्रय योगमाया का !

घिर आयी तब घटा अचानक
जल से भरे हुए बादल थे,
गहन अंधकार छाया था
बरसे झूम एक जलथल थे !

वसुदेव गोकुल जा पहुँचे
पार किया यमुना का पाट,
सोयी कन्या बदले में ली
कान्हा भया नन्द का लाल !

रस स्वरूप वह कृष्ण कन्हाई
प्रेम भरे अंतर में रहता,
सुख की सदा फुहार बरसती
नयनों से अश्रु जल बहता !

मधुर वेदना बन आता है
नेह, राग, अनुराग भी कह लें,
प्रेम के जितने रूप जानते
उस कान्हा को देकर बह लें !

ज्यों तरंग पूछे सागर से
कहाँ है जल? मैं ही तो हूँ
कोई पूछता है कान्हा से
कहाँ हो तुम ? बस मैं ही तो हूँ

पिघल गया हो नेह ताप से
वह अंतर जो निर्मल, कोमल,
सहज ही बहता कृष्ण ओर वह
ज्यों नदिया खोजे सागर जल !

एक ही बाधा है मिलने में
बीच खड़ी मैं की दीवार,
कुम्भ के भीतर-बाहर जल है
टूटे से होता इक सार !  
  
  





14 टिप्‍पणियां:

  1. शनिवार 11/08/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर.....पर्व की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. कृष्ण जन्म की बहुत सुंदर और प्यारी रचना ...

    जन्माष्टमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत प्यारी रचना ...
    कृष्ण जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनायें...

    उत्तर देंहटाएं
  5. एक ही बाधा है मिलने में
    बीच खड़ी ‘मैं’ की दीवार,
    कुम्भ के भीतर-बाहर जल है
    टूटे से होता इक सार !

    बहुत प्यारी रचना ...जन्माष्टमी की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  6. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. एक ही बाधा है मिलने में
    बीच खड़ी ‘मैं’ की दीवार,
    कुम्भ के भीतर-बाहर जल है
    टूटे से होता इक सार !

    एक ही बाधा है मिलने में
    बीच खड़ी ‘मैं’ की दीवार,
    कुम्भ के भीतर-बाहर जल है
    टूटे से होता इक सार !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर भाव से भरी रचना .जन्माष्टमी की शुभकामनायें..

    उत्तर देंहटाएं
  9. कृष्ण कथा की सुंदर काव्यात्मक प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  10. जन्माष्टमी की शुभकामनायें!

    कृष्ण जी का आशीर्वाद सदा रहे!!

    जय श्री कृष्ण !!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत प्यारी उत्कृष्ट रचना..
    जन्माष्टमी की शुभकामनाये..
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  12. यशोदा जी, अनु जी, रीना जी, मनोज जी, इमरान, अमृता जी, रविकर जी, अजय जी, वन्दना जी, माहेश्वरी जीव संगीता जी आप सभी का स्वागत व आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर रचना
    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना

    उत्तर देंहटाएं