मंगलवार, नवंबर 3

हम और वह


हम और वह

हम नहीं होते जब वह होता है
बंद हो जाती है आँख जब वह
 अपने आप में समोता है
हमारा होना ही उसका न होना है
उसका होना ही हमारा खोना है
उतार सारे मुखौटे
जब जाते हैं हम उसके करीब
हम में कुछ बचता ही नहीं
बस रह जाता है वह रकीब
हर चाहत एक चेहरा है
हर लक्ष्य सबब बनता
उससे दूर ले जाने का
हर ख्वाहिश उसे खोने का
वह जो हर कहीं है.. हमारे होने से ही तो है ढका !


8 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्कार अनीता जी!

    आपको जानकर खुशी होगी कि आप जैसे लोगो के कार्य को अब एक स्थान मिल गया
    है. अब आप अपने हिन्दी चिट्ठे/जालघर को webkosh.in पर मुफ्त सूचीबद्ध कर
    सकते है

    Webkosh: हिंदी जालघर निर्देशिका एक मुफ्त ऑनलाइन निर्देशिका है, जो
    हिंदी जालघरों तथा चिट्ठों को वर्णक्रमानुसार एवं श्रेणीनुसार सूचीबद्ध
    करता है.
    जो इंटरनेट पर उपलब्ध हिंदी जालघरों/चिट्ठों का पूर्णतः समर्पित एकमात्र स्थान है.


    आज ही अपना हिंदी जालघर /चिट्ठा http://www.webkosh.in/add.html सूचीबद्ध
    करें तथा अपने दोस्तों से भी करवायें.

    धन्यवाद.

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  2. उतार सारे मुखौटे
    जब जाते हैं हम उसके करीब
    हम में कुछ बचता ही नहीं
    बस रह जाता है वह रकीब.

    कितना सच है. सुंदर प्रस्तुति.

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  3. बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)
    नयी पोस्ट@धीरे-धीरे से

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  4. सुन्दर रचना ......
    मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/
    http://kahaniyadilse.blogspot.in/

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  5. उतार सारे मुखौटे
    जब जाते हैं हम उसके करीब
    हम में कुछ बचता ही नहीं
    बस रह जाता है वह रकीब.

    खूबसूरत रचना.

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  6. आप सभी का स्वागत व आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  7. हर चाहत एक चेहरा है
    हर लक्ष्य सबब बनता
    उससे दूर ले जाने का
    हर ख्वाहिश उसे खोने का
    ....बिलकुल सच कहा है...बहुत गहन और सुन्दर प्रस्तुति...

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