मंगलवार, दिसंबर 26

नया वर्ष आने वाला है



नया वर्ष आने वाला है

शब्दों में यदि पंख लगे हों
उड़ कर ये तुम तक जा पहुँचें,
छा जाएँ इक सुख बदली से
भाव अमित जो पल-पल उमगें !

एक विशाल लहर सागर सम
अंतरिक्ष में नाद उमड़ता,
हुआ तरंगित कण-कण भू का
आह्लाद अम्बर तक फैला  !

आगत का स्वागत करने को
 उत्सुक हैं अब दसों दिशाएं,
करें सभी शुभ अभिलाषा जब
कंठ कोटि मंगल ध्वनि गायें !

हर पल मन अभिनव हो झूमे
नित नूतन ज्यों भोर सँवरती,
बाँध सके नहीं कोई ठौर
कहाँ कैद कुसुमों में सुगन्धि !

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लिखा आपने। नमन आपको और आपकी लेखनी को।

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  2. सुन्दर महकती हुयी रचना ... जिसकी सुगंध भी कैद में नहीं रहेगी ... लाजवाब भावपूर्ण ... नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनायें ...

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    1. बहुत बहुत आभार और आपको भी नव वर्ष की शुभकामनायें !

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  3. ''लोकतंत्र'' संवाद के प्रथम अंक में आप सभी महानुभावों का स्वागत है।

    आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग पर 'बृहस्पतिवार' २८ दिसंबर २०१७ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  4. इतनी सुन्दर कामना मन विभोर कर गई - तथास्तु !

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  5. बहुत सुन्दर. नए साल की शुभकामनाएँ.

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  6. उत्कृष्ट व सराहनीय प्रस्तुति.........
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओ सहित नई पोस्ट पर आपका इंतजार .....

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  7. आपको सूचित करते हुए बड़े हर्ष का अनुभव हो रहा है कि ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग 'मंगलवार' ९ जनवरी २०१८ को ब्लॉग जगत के श्रेष्ठ लेखकों की पुरानी रचनाओं के लिंकों का संकलन प्रस्तुत करने जा रहा है। इसका उद्देश्य पूर्णतः निस्वार्थ व नये रचनाकारों का परिचय पुराने रचनाकारों से करवाना ताकि भावी रचनाकारों का मार्गदर्शन हो सके। इस उद्देश्य में आपके सफल योगदान की कामना करता हूँ। इस प्रकार के आयोजन की यह प्रथम कड़ी है ,यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। आप सभी सादर आमंत्रित हैं ! "लोकतंत्र" ब्लॉग आपका हार्दिक स्वागत करता है। आभार "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  8. महकती हुयी रचना नए साल की शुभकामनाएँ.

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