शुक्रवार, दिसंबर 5

वक्त आज है खराब

वक्त आज है ख़राब!



हफ्तों से था
जिस का इंतजार
आज भी आया नहीं
उस खत का जवाब
वक्त आज है खराब !

जाना है जरुरी
बरसे हैं बादल
जाने क्यों आज बेहिसाब
वक्त आज है खराब !

चाहा था जिससे
बिगड़ा वह हर काम
दिए बिना कोई सबाब
वक्त आज है खराब !

हर कोई डाल रहा
जाने क्यों आज
झूठ मूठ ही रुआब
वक्त आज है खराब !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें