गुरुवार, जुलाई 11

जीवन - मरण


जीवन - मरण

उसे ज्ञात है कि जो कुछ भी 'अच्छा' है
वह उसके बस में है
अगर उसका होना
कुदरत के साथ एक होने में ही हो
नहीं हो कोई भी निजी योजना
जब हवायें सांझी है
छूट है विचरने की सबको यहाँ धरती और आकाश में
फ्लू वायरस तक भेद नहीं करते अँधेरे और प्रकाश में
यहीं की मिट्टी से उपजा अन्न
इसी की समझ से बना.. मन !

और.. अच्छा होने का अर्थ है
जो सबको आनंदित करे
एक खिला हुआ फूल ज्यों
आँखों से बहता हुआ प्रेम झरे
पूरी बात सुने बिना
जवाब न देना ..  सोच भी न जगाना
सीख ली हो प्रतीक्षा करने की कला बिना अधीर हुए
तब जीवन हो जाता है सहज
मरण रह जाता है शब्द महज !

7 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (13 -07-2019) को "बहते चिनाब " (चर्चा अंक- 3395) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….
    अनीता सैनी

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति गहराई से सच्चा सच्चा अनुबंध।
    वाह्ह्ह।

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  3. अच्छा होना जो सबको आनंदित करे ... प्रतीक्षा को सहज लेना आसान नहीं होता ... अधीर है इंसान बस यह कमी है ... अच्छी रचना है ...

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