रविवार, जनवरी 11

नये साल की कविता

नये वर्ष के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ 


नये साल में निर्दोष न मारे जायें 

 हो नहीं अन्याय का शिकार भी कोई, 

बंद हों युद्ध, करें  निर्माण देशों का 

हो हितैषी ‘ए आइ’ न छल करे कोई !


मिटे विषमता, हर भेद मिटे दुनिया से 

हर इंसान, इंसान की क़ीमत जाने, 

दिल की गहराई में झांक सके मानव 

नहीं किसी को, कभी भी पराया माने !


एक ही लौ, जल रही है हरेक दिल में 

 संग शीतलता के जो उजाला देती, 

नूतन वर्ष  में बने वही पथ प्रदर्शक 

युगों-युगों से जो सदा हौसला देती !